उत्तराखंड
एक-दो नहीं चार बड़े कारण… जिनके चलते ऑस्ट्रेलिया से बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी हारा भारत
भारत के 162 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने चार विकेट खोकर सिडनी टेस्ट में जीत हासिल की। ऑस्ट्रेलिया ने इस जीत के साथ 10 साल बाद बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 3-1 से जीतकर डब्ल्यूटीसी फाइनल में जगह बनाई। भारत पर्थ में खेला गया पांच मैच की सीरीज का पहला मैच ही जीतने में कामयाब रहा। पिंक बॉल से खेला गया दूसरा टेस्ट जीतकर ऑस्ट्रेलिया ने 1-1 से बराबरी कर ली। ब्रिसबेन में खेला गया तीसरा टेस्ट बारिश के चलते ड्रॉ हुआ तो मेलबर्न में खेला गया, चौथा मैच कंगारुओं ने जीता। सीरीज में 1-2 से पिछड़ने के बाद भारत को हर हाल में आखिरी मैच जीतना था, जो हो न सका। चलिए ऐसे में समझते हैं वो तीन कारण, जिनके चलते भारत ने बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी गंवा दी।
भारतीय टीम इस सीरीज की छह पूर्ण पारियों में 200 रन के आंकड़े को भी नहीं छू पाई इसलिए यह बताने की जरूरत नहीं है कि दौरे में क्या गलत हुआ। पहले टेस्ट की दूसरी पारी को छोड़कर, भारतीय बल्लेबाजी शायद ही कभी रंग में नजर आए। भारतीय बल्लेबाजी ने नौ पारियों में से केवल एक बार 300 रन का आंकड़ा पार किया, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने श्रृंखला में तीन बार 300 रन का आंकड़ा पार किया। पहली बार ऑस्ट्रेलिया गए यशस्वी जायसवाल (391) और नीतीश कुमार रेड्डी (298 रन) टॉप स्कोरर थे।
भारत पहले टेस्ट में तीन स्पेशलिस्ट सीमर्स और दो ऑलराउंडरों के साथ उतरा, फिर इसी फॉर्मूले को हर मैच में दोहराता चला गया। पर्थ में खेले गए पहले मैच में भारत ने 295 रन से बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन जैसे-जैसे श्रृंखला आगे बढ़ी, भारत को बहुत सारे बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा। पहले मैच से बाहर रहे कप्तान रोहित शर्मा को अगले मैच की प्लेइंल इलेवन में फिट करना पड़ा। बाद में वही टीम के लिए बोझ बन गए। टॉप ऑर्डर अव्यवस्थित रहा। केएल राहुल की फॉर्म खराब हो गई। इसके अलावा, नाजुक बल्लेबाजी लाइनअप ने एक स्पेशलिस्ट सीमर की जगह नहीं बनने दी।
नियमित कप्तान रोहित शर्मा और स्टार बल्लेबाज विराट कोहली तकनीकी समस्याओं के कारण पूरे सेशन में एक अदद अच्छी पारी के लिए जूझते रहे। रोहित छह पारियों में 31 रन ही बना पाए तो विराट ने नौ पारियों में 190 रन बनाए, जिसमें एक शतक भी शामिल था। रोहित और कोहली की खराब फॉर्म को लेकर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि दोनों दिग्गजों के लिए अपनी बल्लेबाजी में आई गिरावट को रोकना मुश्किल होता जा रहा है। कोहली और रोहित पर कड़े फैसले का इंतजार है।
जसप्रीत बुमराह ने सीरीज में 32 विकेट लेकर किसी एक विदेशी दौरे में सबसे ज्यादा शिकार करने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। दाएं हाथ के पेसर को प्लेयर ऑफ द सीरीज भी चुना गया। मगर बुमराह अकेले लड़ते रहे, उन्होंने दूसरे एंड से किसी का साथ नहीं मिला। बुमराह की अनुपस्थिति ने दिखाया कि भारत को श्रृंखला के आखिरी दिन किस चीज की कमी खली, फिर भले ही ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी रहा हो। जैसा कि ग्लेन मैकग्रा ने कहा कि अगर बुमराह ने 32 विकेट नहीं लिए होते तो भारत की हार का अंतर और ज्यादा होता।

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