उत्तरकाशी
Uttarkashi Tunnel Rescue: अब हैदराबाद से लाया गया प्लाज्मा कटर, इस प्लान पर होगा आगे काम…
उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन का आज 15वां दिन है। 41 मजदूरों को मलबे से बाहर निकालने की राह पहले दिन जितनी आसान लग रही थी, 15वें दिन आने तक वहां डगर बेहद मुश्किल हो गई। लेकिन उम्मीद के चराग जैसे जलते है मायूसी का अंधेरा छा जाता है। हर प्रयास नाकाम हो रहा है। उत्तरकाशी में बचाव टीम ऑगर से पेंच काट रही है। इस कार्य में तेजी लाने के लिए इंजीनियरिंग समूह लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) से बचाव टीम को एक प्लाज्मा मशीन मिली है। इस मशीन को एलएंडटी का क्रिस कूपर कहा जाता है।
सिलक्यारा में वर्टिकल ड्रिलिंग को लेकर असमंजस की स्थिति है। सतलुज जलविद्युत निगम लिमिटेड के अधिकारी बस इंतजार कर रहे हैं। वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए पाइल ड्रिलिंग मशीन शनिवार देर रात को ही सुरंग की ऊपरी पहाड़ी पर चैनेज 300 पर पहुंच चुकी थी, जबकि इस पर असेंबल किए जाने वाले कई पार्ट अब तक नहीं पहुंचे हैं। इस स्थिति को लेकर एसजेवीएन लिमिटेड के अधिकारियों ने नवयुग कंपनी के प्रति नाराजगी भी जाहिर की। असेंबल किए जाने वाले पार्ट को पहुंचाने के लिए पहले शनिवार रात का समय दिया गया था।
वहीं रेस्क्यू के संबंध में अस्थाई मीडिया सेंटर सिलक्यारा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रेस ब्रीफिंग की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि कठिन परिस्थितियों में सरकार पूरी शिद्दत के साथ रेस्क्यू कार्य में जुटी है। उन्होंने कहा कि पाइप में फंसी ऑगर मशीन को जल्द ही काट के निकाल लिया जाएगा। जिसके लिए हैदराबाद से प्लाज्मा कटर भी मंगाया गया है। उन्होंने कहा कि मैं स्वयं कम्युनिकेशन सिस्टम के माध्यम से अंदर फंसे श्रमिकों से बात कर रहा हूँ। सभी श्रमिक स्वस्थ हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा समन्वय बनाते हुए सभी संभव विकल्पों पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियां हर संभव प्रयास कर रही हैं। दुनिया भर के विशेषज्ञों का इसमें तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सुरंग में फंसे सभी श्रमिकों को सुरक्षित निकालना है। यह कार्य काफी चुनौतीपूर्ण है, बावजूद सभी केंद्रीय और राज्य की एजेंसियां दिनरात काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंतर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। रेस्क्यू कार्य में किसी भी तरह की अड़चन न आये, इसके लिए पहले से ही सेना के अलावा देश और विदेश की विशेषज्ञ तकनीकी एजेसियों की मदद ली गई है। रेस्क्यू कार्य में तकनीकी और संसाधनों की कोई कमी नहीं है।

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