अल्मोड़ा
Uttarakhand News: अल्मोड़ा की महिका बिष्ट बनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट…
देवभूमि की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का डंका बजा रही है। उत्तराखंड की एक बेटी ने दिवंगत पिता की इच्छा पूरी करने के लिए हाड़तोड़ मेहनत की, और बन गई भारतीय सेना में लेफ्टिनेट। जी हां मित्र बिहार कालौनी देवलचौड़ हल्द्वानी निवासी स्वर्गीय स्वर्गीय राजेन्द्र सिंह बिष्ट की पुत्री महिका बिष्ट भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनी हैं। उनकी इस उपलब्धि पर उनके निवास हल्द्वानी व उनके मूल निवास अल्मोड़ा के ब्लाक लमगड़ा के सांगड गाँव व उनके परिजनों व रिस्तेदारों में खुशी का माहौल है।
महिका की हाईस्कूल तक की पढ़ाई होली सेपियंश स्कूल सितारगंज, इंटर मीडिएट डोन मोस्को स्कूल हिम्मतपुर हल्द्वानी व बी एस सी की पढ़ाई डी एस बी कैंपस नैनीताल से हुई है। इसके बाद उन्होंने आर्मी कोर के इलेक्ट्रिकल मैकेनिकल से कमीशन प्राप्त किया, उनके पिता स्वर्गीय राजेन्द्र सिंह बिष्ट चीनी मिल सितारगंज में कार्यरत थे, माता इंद्रा बिष्ट गृहणी है, महिका के बडे भाई, रचित बिष्ट इंटर नेशनल एयरपोर्ट दिल्ली में ब्रांड एम्बेसडर के रूप में कार्यरत है। वे अपनी बेटी को लेफ्टिनेंट बनना देखना चाहते थे। आज बेटी ने अपने पिता और पूरे परिवार का सपना पूरा कर लिया है।
माहिका के पिता की इच्छा थी कि उनके बच्चे कुछ अलग करें। माहिका ने विगत 29 अक्टूबर को चेन्नई में पासिंग आउट परेड के बाद सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर नियुक्ति पाई है। इस कार्यक्रम में उनके परिजन भी मौजूद रहे। बेटी की सफलता पर परिजन भावुक हो उठे। माहिका का परिवार मूलरूप से सामंड लमगड़ा जिला अल्मोड़ा का रहने वाली है। माहिका का नैनिहाल हल्द्वानी के बच्ची नगर नंबर 2 में है। नातिन के सेना में लेफ्टिनेंट बनने पर नैनिहाल में खुशी का माहौल है।

लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -
👉 पहाड़ी खबरनामा के वाट्सऐप ग्रुप से जुड़ें
👉 पहाड़ी खबरनामा के फेसबुक पेज़ को लाइक करें
Latest News -
संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बने डीएम बंसल, सोशल मीडिया पर डीएम सविन बंसल के समर्थन की बयार…
उत्तराखंड: धामी सरकार के नाम एक और कीर्तिमान उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या ने तोड़ा रिकॉर्ड…
उत्तराखंड: नकल विरोधी कानून पर आधारित शॉर्ट फिल्म रिलीज…
कैबिनेट के अहम फैसले: स्वास्थ्य कर्मियों को जनपद परिवर्तन, ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मंजूरी…
यूसीसी का एक साल: एआई सहायता के साथ 23 भाषाओं में उपलब्ध सेवाएं, उत्तराखंड बना तकनीकी उत्कृटता का मॉडल…






















Subscribe Our channel



